कुल्हाड़ी
नीले आकाश तले
वृक्षों के उस झुरमुट में,
दूर कहीं किसी वन में
एक नन्हा सा फूल महकता है।
कोयल की बोली सुन कर
एक भंवरा जगता है,
मदहोशी के आलम में पंख फैलाये हुए
उड़ता है, मचलता है।
उपवन का हर वासी
रंगो भरे उस आँगन में,
उनींदी आँखे भर कर प्यार लुटाता है,
प्रेम गीत गाता है, चहकता है।
मधुबन की इन खुशियों को
शैतानी नज़रों से,
बस दूर ही रहने दो
कुल्हाड़ी लिए हाथों में ये कौन निकलता है?
Beautifully written.
जवाब देंहटाएंZindagi ka aagaz aur ant dono dikha diye.
Excellent
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंबहुत सुंदर अनुभूति और शानदार अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंबहुत बेहतरीन ! The eeriness impending disquiet is so beautifully expressed! 🙂
जवाब देंहटाएंकमाल लिखा है भाई ---वाह वाह--- लिखते रहो लोग आज नहीं तो कल पढ़ेंगे जैसे कबीर को पढ़ते हैं
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