मेरे बारे में

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सोचा चलो ब्लॉग लिखते हैं. एक तो मुफ्त में है और दूसरा ब्लॉग पढ़ कर समझने वालों कि संख्या बहुत कम है. मुझे जानने वाले तो मेरा ब्लॉग पढ़ेंगे नहीं. आखिर कोई कितना झेले? कोई 'सॉरी गलती से मिस्टेक हो गया टाइप' अगर झांसे में आ भी गया तो थोड़ी सी उम्मीद है कि मेरे शब्दों के जाल उसे उलझा कर रख पाएं. कोई नहीं तो मैं और मेरा खुदा तो है ही. जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा होता है. मेरे बड़े भाई नीरज काफी समय से ब्लॉग लेखन में हैं. मैंने उनका ब्लॉग देखा है, पढ़ा नहीं. क्योंकि शायरी का अलफ बे भी मुझे नहीं आता. तो फिर हमने सोच लिया 'अब चाहे सर फूटे या माथा यारा मैंने तो हाँ कर दी, मैंने ब्लॉग की शुरुआत कर दी, मैंने हँस कर हामी भर दी' लिखने को कुछ समसामयिक विषय होंगे. कुछ छोटी मोटी कहानियों या कविताओं की समीक्षाएं होंगी जो मैं मुख्यत: बच्चों की पाठ्य पुस्तकों से चुनूंगा. ये कुछ आसान सी कहानियाँ और कवितायें अब मुझे थोड़ी बहुत समझ आने लगी हैं. ये रचनाएँ आज के सन्दर्भ में सरलता से अति महत्वपूर्ण सन्देश देती हैं. कुछ बातें दिल को छुएंगी तो कुछ बातें गुस्सा भी दिला सकती हैं. बात अपनी अपनी, ख्याल अपना अपना.

शनिवार, 17 अगस्त 2019

दामिनी

दामिनी












" इन लड़कन को कोरट ने बाइज़्ज़त बरी कर दिया " पान की पीक थूकते हुए वकील साहब इतराए। 

" वो तो इस घर की दुश्मन दामिनी ने पुलिस में रपट कर दी वरना घर का मामला घर में ही निपटा देते " ठाकुर साहब झुंझलाते हुए बोले। 

" जवान नादान लड़के हैं, और उस हुसन परी को भी पल्लू संभालना नहीं आता। बचपन से पाला था अनाथ समझ कर, बदले में घर का चौका बासन ही तो बस ? " ठकुराइन मुँह बिचकाते हुए उठ खड़ी हुई। 

" लेकिन बिटिया अभी भी आईसीयू बेहोश है उसका क्या ? " रामू काका धीरे से बुदबुदाए। 

ठाकुर साहब आँखे तरेरते हुए बोले " उसके मामा को पैसे दे दिए हैं, कहीं ब्याह करवा देगा, ससुराल जाएगी सुखी रहेगी। भगवान का शुक्र है ठाकुर ख़ानदान की नाक कटने से बच गई। "

बाहर धम्म से कुछ गिरने की आवाज़ आई और फिर एक चीख। 

" दामिनी बिटिया " रामू काका का भरभराया स्वर और फिर गहरी नीरवता …

इतिहास गवाह है। कमज़ोर आवाज़ें ऐसे ही दफ़्न होती आई हैं और ऐसे ही बेआवाज़ कहीं खो जाएँगी।



आपदा में अवसर

  आपदा में अवसर 'रेवड़ी ले लो, रेवड़ी ले लो' बाहर से जोर जोर से आवाज़ें आ रही थीं। जनप्रिय नेता पीएल ने अपनी पार्टी की टोपी सीधी की औ...