छुटकी #1
लहू
लहू,
सड़क पर बहा,
फिर बहा, बहता रहा,
बहता रहा, जमता रहा, सूखता रहा,
न कोई फल, न कोई फूल, न कोई पंछी, न परिंदे,
और इस तरह एक सभ्यता उजड़ गई...
छुटकी #2
जड़ें
जड़ें,
दिखी नहीं, बच गईं,
फूल कुम्हला गए, पत्तियां झर गईं,
सूखे ठूंठ रह गए, कट गए,
लताएं झुलस गईं, कीट मरे, पक्षी उड़ गए,
वृक्ष के साथ जो एक भरा पूरा कुनबा था, अब उजड़ गया,
और इस तरह ये हरी भरी फलती फूलती वसुंधरा निर्जीव और वीरान बन गई...
छुटकी #3
धर्म की परिभाषा
उसने कहा ‘मैं बड़ा ,तू छोटा’,
इसने कहा ‘तू छोटा, मैं बड़ा’,
फिर जो होता है वो ही हुआ, दोनों भिड़ गए,
लड़ते रहे निरंतर लड़ते रहे,
और इस तरह धर्म की परिभाषा गढ़ी गई...