काला पानी और टूल किट
नेताजी ने सेल्फी ली, सेल्युलर जेल की पांचवी मंज़िल के कंगूरे से। फ्रेम में नेताजी का टूटे दाँतों वाला मुस्कुराता हुआ मगर धीर गंभीर चेहरा, सेल्युलर जेल और दूर अथाह समुद्र ही समुद्र दिखाई दे रहा था। नेताजी ने मुंह पर हाथ रख कर अपने सेक्रेटरी को पूछा 'ये समुन्द्र तो नीला है?'
सेक्रेटरी साहब पुराने
घाघ थे बोले
'साहिब, कांट्रेक्टर को कहा
था कि समंदर
में काला रंग
पोत देना वरना
जनता नहीं मानेगी
कि आपने इस
कोरोना काल में
भी २८ घंटे
प्रतिदिन काम करते
हुए इतना जान
का जोखिम उठा
कर काला पानी
जेल का पुनः
नामकरण किया है।
लेकिन आप चिंता
न करें अपना
आईटी सेल सब
संभाल लेगा। इंस्टाग्राम और ट्विटर में
आपके स्टेटस में
समुन्दर काला ही
दिखाई देगा। और
अगले फोटो में
आपके उद्घाटन और
नामकरण के बाद
समुन्दर झक सफेद
दिखेगा। अख़बार और टीवी
की हेडलाइन होगी
- नेताजी ने काला
पानी जेल का
जीर्णोद्धार किया और चरणस्पर्श
मात्र से समुद्र
मंथन के बाद
काला पानी श्वेत
कांति से जगमगा
उठा।'
फिर सेक्रेटरी साब सांस
लेने को रुके।
ये अवसर था
जब सेल्युलर जेल
का नया नाम
रख कर उद्घाटन
किया गया था।
भव्य उद्घाटन। इधर
नेताजी ने ‘सफेद
पानी’ सेल्यूर जेल
देश को समर्पित
करते हुए फीता
काटा, कुछ और
सेल्फी लीं, हाथ
हिलाये और मुस्कुराये।
नेताजी ने अपने संक्षिप्त भाषण में जनता
को उद्बोधन करते हुआ कहा 'हमारी सरकार के इस क्रांतिकारी कदम ने भारत की प्राचीन सभ्यता
की इस विरासत में लगी कालिख को धो डाला है।‘ 'नेताजी मुस्कुराये
और हाथ उठा
कर अभिवादन स्वीकार
किया। नेपथ्य
से रिकॉर्ड किये
हुए तालियों की
गड़गड़ाहट सुनाई पड़ रही
है।
नेताजी ने अपने
लम्बे चौड़े भाषण
में 'जन जन
जेल योजना' के
तहत आश्वासन दिया
कि जल्द ही
हमारे वायदे के
अनुसार देश के
हर गांव और
शहर के हर
कोने कोने में
लेटेस्ट मॉडल के
जेल स्थापित किये
जायेंगे। जनता
को घर के
आसपास ही जेल
कि समूची सुविधा
उपलब्ध होगी। अब
जेल जाने के
लिए सात समुन्दर
पार नहीं जाना
पड़ेगा।
बॉलीवुड ने भी
आनन फानन में
'सेल्युलर जेल एक
प्रेम कथा' बना
कर देश प्रेमियों
के सहयोग से
बॉक्स ऑफिस पर
रिकॉर्ड कमाई कर
ली थी। जेल
एक आत्मकथा को
राष्ट्रीय फिल्म पुरूस्कार देने
कि घोषणा सुनते
ही उपस्थित जन
समूह हर्षोल्लास से
भर गया था।
मुहूर्त शॉट के
लिए कैदी नंबर
१ को स्टेज
पर लाया गया।
कैदी को हथकड़ी
लगी थी। लेकिन ऊपर से
गेंदे के फूलों
की माला से हथकड़ी
को ढक दिया
गया था। आखिर
जेड प्लस प्लस सिक्योरिटी
का सवाल जो
था। नेताजी ने
कैदी के चरण
गंगा जल से
धोए, ललाट पर तिलक
लगाया, आरती उतारी
और आशीर्वाद की
मुद्रा में कैदी
के सर पर
हाथ रखा। फोटोग्राफरों
के हुजूम ने
कई पोज़ बनवाये,
एंगल सेट किये
और दनादन फोटो
और वीडियो उतारने
शुरू किये।
नेताजी ने वन्दे
मातरम का तीन
बार जबरदस्त नारा
लगाया और मुस्कुराते
हुए प्रस्थान कर
गए। उपस्थित मेहमानों
और मीडिया कर्मिओं
ने नाश्ते और
खाने के हर
सामान को पूरी
तल्लीनता से उदरस्थ
किया और इस
तरह से ये
उपक्रम पूरा हुआ।
चूँकि इस जेल
को वर्ल्ड हेरिटेज
का दर्ज़ा मिला
था इसलिए यूएन
के विशेष आर्थिक
सहयोग से जेल
बिल्डिंग की मरम्मत
हो रही थी। विदेशों
से पधारे कई
महान नेता और
मीडिया पत्रकार भी भारी
संख्या में उपस्थित
थे। मेहमानों में
ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन की
युवा रिसर्च असिस्टेंट
मिस मेरी भी
थी। मिस मेरी
दरअसल 'भारतीय जेलों में
कैदियों की स्थिति’
विषय पर शोध
के बाबत इस
जेल में कुछ
इंटरव्यू लेने को
रुक गईं थी।
जेलर साहब ने
कैदी को हिकारत
भरी नज़र से
निहारा। एक
दुबला पतला वयोवृद्ध। दुबारा
हथकड़ी पहनाने कि
चेष्टा की पर
शायद शर्म महसूस
हुई। जेल
के नए पुते
हुए कमरा नंबर
१ में कैदी
नंबर १ को
छोड़ कर बोले
'वेलकम टू सफेद
पानी। कल
से मिस मेरी
रोज तुम्हे क्लास
लेंगी और लेखा
जोखा पूछेंगी।' फिर
केस फ़ाइल की
एक कॉपी मिस
मेरी को थमा
कर मुस्कुराये 'चलिए
आराम कर लीजिये।
कल से रोज
१० से ५
ये कैदी आपकी
गिरफ्त में रहेगा,
दुर्दांत आतंकवादी है, सावधान
रहिएगा।'
मिस मेरी की
कान पर टिका
चश्मा बारम्बार नाक
पर धीरे धीरे
खिसकता रहता था
जिसे वो समय
समय पर एक
अदा से ऊपर
खिसका देती थी।
जेलर साहब मिस
मेर के चेहरे
के भाव पढ़ने
में असमर्थ रहे
तो खिसियाते हुए
बोले 'मेरे लायक
कुछ भी काम
हो तो निसंकोच
कहियेगा।' शायद देवानन्द
की स्टाइल में
‘बंदा हाज़िर हो
जायेगा’ कहना चाहते
थे पर फिर
गर्दन झुका कर
धीरे से प्रस्थान
कर गए।
कैदी नंबर १
मिस मेरी का
आमना सामना अगले
दिन ठीक १०
बजे हुआ।
'आपका नाम?' एक लम्बा
चौड़ा प्रिंटेड फॉर्म
लेकर मिस मेरी
ने इंटरव्यू प्रारम्भ
किया।
'कबीर'
'बाप का नाम?'
मिस मेरी की
हिंदी बहुत अच्छी
थी। अगर
गोरी चमड़ी और
नीली आँखे न
होतीं तो कोई
भी उसकी शुद्ध
हिंदी पर विश्वास
न करता।
'नीरू '
'पूरा नाम?'
'नीरू जुलाहा'
'धर्म?'
'पहले हिन्दू, फिर मुसलमान,
फिर हिन्दू'
'जाति?'
'जाति न पूछो
साधु की, पूछ
लीजिये ज्ञान।' फिर कुछ
सोच कर बोला
'जाति जुलाहा, नाम
कबीरा, बनी बनी
फिरो उदासी' और
पुनः शून्य में
ताकने लगे।
'क्या मतलब?' मिस मेरी
के चेहरे पर
पहली बार कोई
स्पष्ट भाव दिखाई
दिए। उसकी त्यौरी
चढ़ी हुई थी।
'जब मैं था
तब हरी नहीं,
अब हरी है
मैं नहीं। प्रेम
गली अति सांकरी,
वामें दो नहीं
संमाहि।'
मिस मेरी के
चेहरे के भाव
बदले। कुछ
कन्फूज़न युक्त मुस्कान थी।
ऐसी मुस्कान में
आँखें विरक्त रहती
हैं केवल होठ
थोड़ा सा हिलते
हैं।
थोड़ा संयत होते
हुए पूछा 'निवासी?'
'काशी'
'बाबा किस जुर्म
में धरे गए
हो?' शायद ये
भाषा मिस मेरी
के भोले चेहरे
के साथ फिट
नहीं बैठती थी
लेकिन फिर भी
उनकी क्रिमिनोलॉजी की
ट्रेनिंग में सिखाया
जाता है कि
अपराधी से दोस्ती
बनाओ और सच
उगलवाओ।
'देशदोह, दंगे भड़काने,
आतंकवाद, ब्लासफेमी, धारा २९५,
१२४ ए वगैरह
वगैरह'
अब मिस मेरी
ने उस कैदी
को गौर से
देखा। बूढी,
चेहरे में धंसी
हुई आँखें लेकिन
एक अजीब सी
चमक। मिस मेरी
ने हिकारत भरी
नज़र से दोबारा
ध्यान से घूरा। देशद्रोह?
जिस थाली में
खाया उसी में
छेद किया? एहसान
फरामोश। गोल
टोपी और उस
पर मोर पंख
, गले में कंठी
माला, सफेद दाढ़ी,
झुकी हुई मूछें
, माथे पर चंदन
तिलक, अजीब बहुरूपिया।
'कहाँ धरे गए?'
'गंगा घाट पर,
पंच गंगा की
सीढ़ी'
'कब?'
'सुबह की मंगल
आरती से पहले'
'क्या कर रहे
थे?'
'एक फकीर क्या
करता है? मस्ती।
एक फकीर झोला
लेकर जा रहा
है, बस इतना
ही '
'फकीर? झोला?'
'हाँ, मस्ती में गा
रहा था 'लूट
सके तो लूट,
राम नाम की
लूट, पीछे फिर
पछताओगे जब प्राण
जायेंगे छूट'
'तो इसमें क्या?'
'पुलिस संतरी हमको दबोच
कर थाने ले
गया। पुलिस ऍप
में की वर्ड डाले – ‘लूट’,
‘राम’, ‘प्राण’ और कर
दिया सींखचों के
अंदर। दरोगा जी
आये और एक
घूंसा मार कर
बोले सब कोड
वर्ड बतलाते हैं
कि तुम राम
भक्तों के प्राण
लेने और उनको
लूटने के लिए
घाट पर घूम
रहे थे। इलेक्शन
सर पर हैं
और शहर में
हाई अलर्ट है
कि दंगे करवाने
वाले षड्यंत्र कर
रहे हैं। बोलो तुम्हारा
आईएसआई वाला बॉस
कौन है?'

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