मेरे बारे में
- dkgoswamy
- सोचा चलो ब्लॉग लिखते हैं. एक तो मुफ्त में है और दूसरा ब्लॉग पढ़ कर समझने वालों कि संख्या बहुत कम है. मुझे जानने वाले तो मेरा ब्लॉग पढ़ेंगे नहीं. आखिर कोई कितना झेले? कोई 'सॉरी गलती से मिस्टेक हो गया टाइप' अगर झांसे में आ भी गया तो थोड़ी सी उम्मीद है कि मेरे शब्दों के जाल उसे उलझा कर रख पाएं. कोई नहीं तो मैं और मेरा खुदा तो है ही. जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा होता है. मेरे बड़े भाई नीरज काफी समय से ब्लॉग लेखन में हैं. मैंने उनका ब्लॉग देखा है, पढ़ा नहीं. क्योंकि शायरी का अलफ बे भी मुझे नहीं आता. तो फिर हमने सोच लिया 'अब चाहे सर फूटे या माथा यारा मैंने तो हाँ कर दी, मैंने ब्लॉग की शुरुआत कर दी, मैंने हँस कर हामी भर दी' लिखने को कुछ समसामयिक विषय होंगे. कुछ छोटी मोटी कहानियों या कविताओं की समीक्षाएं होंगी जो मैं मुख्यत: बच्चों की पाठ्य पुस्तकों से चुनूंगा. ये कुछ आसान सी कहानियाँ और कवितायें अब मुझे थोड़ी बहुत समझ आने लगी हैं. ये रचनाएँ आज के सन्दर्भ में सरलता से अति महत्वपूर्ण सन्देश देती हैं. कुछ बातें दिल को छुएंगी तो कुछ बातें गुस्सा भी दिला सकती हैं. बात अपनी अपनी, ख्याल अपना अपना.
गुरुवार, 21 सितंबर 2017
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
आपदा में अवसर
आपदा में अवसर 'रेवड़ी ले लो, रेवड़ी ले लो' बाहर से जोर जोर से आवाज़ें आ रही थीं। जनप्रिय नेता पीएल ने अपनी पार्टी की टोपी सीधी की औ...
-
आपदा में अवसर 'रेवड़ी ले लो, रेवड़ी ले लो' बाहर से जोर जोर से आवाज़ें आ रही थीं। जनप्रिय नेता पीएल ने अपनी पार्टी की टोपी सीधी की औ...
-
In this world nothing is in black or white There are shades of Grey इस दुनिया में न ही कोई चीज़ सफ़ेद झक है और न ही काली स्...
-
हर - हर स्टैचू , घर - घर स्टैचू मेरा स्टैचू कब बनेगा ? मचल गया दीना का लाल। दीना सोच में पड़ गया। दीना के बाप दादा का...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें